राम मंदिर के 2.5 एकड़ पर ज्ञान देने वालों से असली सवाल ये है कि महात्मा गांधी की राजघाट वाली समाधि लगभग 44 एकड़, नेहरू की शांतिवन करीब 52.6 एकड़, इंदिरा गांधी की शक्ति स्थल 45 एकड़ और राजीव गांधी की समाधि 15 एकड़ पर फैली है – यानी कुल मिलाकर 100 से भी ज़्यादा एकड़ ज़मीन सिर्फ वीवीआईपी समाधियों के नाम पर घिरी बैठी है।🪦
इन स्मारकों पर कोई हॉस्पिटल, कॉलेज, गरीबों के लिए आवास या पब्लिक फैसिलिटी बनाने की बात नहीं करता, लेकिन जैसे ही अयोध्या में करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र राम मंदिर 2.5 एकड़ में बनता है, कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी अचानक “ज़मीन की बर्बादी” और “अस्पताल बनाओ” की याद दिलाने लगते हैं।🛕🤦♂️
आस्था पर सवाल उठाने वालों को पहले ये जवाब देना चाहिए कि जब नेताओं की समाधियों के लिए दिल्ली जैसी महँगी ज़मीन पर इतने विशाल क्षेत्र घेर कर रखा जा सकता है, तो क्या देश की आत्मा माने जाने वाले श्री राम के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर भी नहीं बन सकता? 🇮🇳🔥
राम मंदिर सिर्फ इमारत नहीं, ये हमारी सभ्यता, इतिहास और स्वाभिमान का प्रतीक है; जो लोग इसे 2.5 एकड़ की ज़मीन से तौलते हैं, शायद उन्हें अपने वोट बैंक की चिंता ज़्यादा है, देश की भावनाओं की नहीं।🚩
दोस्तों, दिल से बताइए – आपको क्या लगता है, जिनको वीआईपी समाधियों की सैकड़ों एकड़ ज़मीन पर कोई आपत्ति नहीं, वही लोग अगर राम मंदिर पर “हॉस्पिटल‑स्कूल” का रोना रोएँ तो क्या इसे सच्चा सेक्युलरिज़्म कहेंगे या साफ‑साफ ढोंग? कमेंट में ज़रूर लिखें 👇💬
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