कभी-कभी बड़ी टेक क्रांति किसी बोर्डरूम से नहीं, रेलवे प्लेटफॉर्म से शुरू होती है।अहमद निजाम मोहाइदीन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।2015 में उनकी ट्रेन घंटों लेट थी। उस वक्त न कोई लाइव ट्रेन ट्रैकिंग ऐप था, न भरोसेमंद जानकारी। प्लेटफॉर्म पर इंतज़ार करते हुए उन्होंने सोचा—अगर ओला और उबर कैब की लाइव लोकेशन दिखा सकते हैं, तो ट्रेन की क्यों नहीं?यहीं से जन्म हुआ Where Is My Train App का।पैसे कम थे, इंटरनेट हर जगह नहीं था, लेकिन आइडिया मजबूत था। अहमद और उनकी टीम ने एक साल में 20 से ज्यादा प्रोटोटाइप बनाए। असफलताएं मिलीं, लेकिन हार नहीं मानी। आखिरकार उन्होंने मोबाइल टावर डेटा के ज़रिये ऐसा सिस्टम बनाया जो बिना GPS और इंटरनेट के भी ट्रेन की लाइव स्थिति बता सके।यही सादगी और उपयोगिता इस ऐप की सबसे बड़ी ताकत बनी।2018 में गूगल ने इस इनोवेशन को पहचाना और करीब 280 करोड़ रुपये में इसे खरीद लिया। मकसद था भारत जैसे देशों में ऑफलाइन टेक्नोलॉजी के ज़रिये ज्यादा यूज़र्स तक पहुंचना।आज Where Is My Train के 10 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हैं।लेट ट्रेन की परेशानी से निकला एक आइडिया, करोड़ों यात्रियों का भरोसेमंद साथी बन चुका है। #StartupStory #IndianEntrepreneur #TechInnovation #SuccessStory #WhereIsMyTrain

