ईरान से इस वक़्त की सबसे बड़ी ख़बर : कुछ ही देर पहले ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह इमाम अली ख़ामेनेई अचानक क़ोम शहर पहुँचे, और सीधे गए उस जगह, जिसका नाम सुनते ही दुनिया की बड़ी ताक़तों की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं जमकरान मस्जिद। वहाँ पहुँचकर उन्होंने नमाज़ अदा की। लेकिन सवाल ये है, क्या ये सिर्फ़ इबादत थी? या फिर किसी तूफ़ान से पहले की ख़ामोशी?
इतिहास ने बार-बार दिया है ये इशारा ईरान का इतिहास साफ़ बताता है, जब-जब इमाम ख़ामेनेई जमकरान मस्जिद गए हैं, उसके बाद ईरान ने ऐसा फ़ैसला लिया है, जिसने पूरे मिडिल ईस्ट को हिला कर रख दिया। यह मस्जिद सिर्फ़ एक धार्मिक स्थल नहीं, ये ईरान के बड़े फ़ैसलों का संकेत केंद्र है। एक और बेहद अहम बात जब भी ईरान पर हमला होता है, या जब किसी हमले का बदला लेना तय हो जाता है, तो इस मस्जिद के गुंबद पर लाल अलम लहराया जाता है। लाल अलम का मतलब साफ़ होता है, इंतकाम बाकी है, और हिसाब पूरा होकर ही रहेगा।
अब सोचिए! इमाम ख़ामेनेई का वहाँ पहुँचना और नमाज़ अदा करना क्या संकेत दे रहा है? अटकलें तेज़, दुनिया अलर्ट अब दो बातें ज़ोर पकड़ चुकी हैं, पहली अटकल (सबसे ख़तरनाक): क्या ईरान ने परमाणु परीक्षण जैसा कोई ऐतिहासिक और चौंकाने वाला फ़ैसला ले लिया है? इसी को लेकर सियासी और सैन्य गलियारों में खलबली मची हुई है। दूसरी और सबसे बड़ी चिंता: इमाम ख़ामेनेई की इस मूव के बाद अमेरिका और इज़राइल में साफ़ घबराहट देखी जा रही है। ख़ुफ़िया एजेंसियाँ टेंशन में अमेरिका और इज़राइल की ख़ुफ़िया एजेंसियाँ ये मानकर चल रही हैं कि ईरान अब कोई बहुत बड़ा, निर्णायक और गेम-चेंजर कदम उठाने वाला है। क्योंकि एक बात तय है, जब-जब इमाम ख़ामेनेई जमकरान मस्जिद पहुँचे हैं, दुनिया ने उसके बाद कुछ न कुछ बड़ा होते ज़रूर देखा है।
अब सबकी निगाहें टिकी हैं, क्या मस्जिद पर लाल अलम फहराया जाएगा? क्या ईरान ऐसा कदम उठाएगा जिससे अमेरिका-इज़राइल की रणनीति धराशायी हो जाए? अगले कुछ घंटे बेहद अहम हैं, दुनिया सांस रोके इंतज़ार कर रही है।

