मालदीव ने फिर बदला अपना रंग! भारत के लिए एक और नई चुनौती।
राष्ट्रपति मुइज्जू ने ‘चागोस द्वीपसमूह’ को लेकर अपना रुख पलट दिया है और अब पूरे द्वीप पर मालदीव का हक जता रहे हैं। लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि ‘इंडिया आउट’ का नारा देने वाले मुइज्जू अब वहां ‘अमेरिकी सैन्य अड्डे’ को मंजूरी देने को तैयार हैं!
क्या है चागोस द्वीप विवाद? (इतिहास)
• ब्रिटेन का कब्जा: 1965 में ब्रिटेन ने इन द्वीपों को मॉरीशस से अलग कर अपने पास रख लिया था।
• अमेरिकी सैन्य अड्डा: ब्रिटेन ने इसमें से ‘डिएगो गार्सिया’ (Diego Garcia) नाम का द्वीप अमेरिका को सैन्य अड्डा बनाने के लिए किराए पर दे दिया।
• अंतरराष्ट्रीय फैसला: इंटरनेशनल कोर्ट (ICJ) और संयुक्त राष्ट्र (UN) स्पष्ट कर चुके हैं कि चागोस पर असली हक मॉरीशस का है और ब्रिटेन को इसे लौटा देना चाहिए।
मालदीव का ‘यू-टर्न’
मालदीव और चागोस द्वीप आस-पास हैं, जिससे दोनों के बीच समुद्री सीमा का विवाद था।
• पुरानी सरकार का रुख: मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह ने मॉरीशस के हक को मान लिया था और एक ट्रिब्यूनल (ITLOS) ने समुद्री सीमा का बंटवारा कर दिया था।
• मुइज्जू का नया दावा: वर्तमान राष्ट्रपति मुइज्जू ने इस फैसले को रद्द कर दिया है। वे अब न सिर्फ समुद्र के उस हिस्से पर, बल्कि पूरे चागोस द्वीपों पर ही मालदीव का मालिकाना हक जता रहे हैं।
मुइज्जू का असली मकसद क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। मुइज्जू यह कदम अप्रैल 2026 में होने वाले स्थानीय चुनावों को ध्यान में रखकर उठा रहे हैं, ताकि वे जनता के सामने खुद को एक कट्टर ‘राष्ट्रवादी नेता’ साबित कर सकें।
भारत के लिए यह ‘सिरदर्द’ क्यों है?
भारत हमेशा से इस मुद्दे पर मॉरीशस का समर्थन करता आया है। मुइज्जू के इस कदम से भारत की कूटनीतिक मुश्किलें बढ़ रही हैं:
1. दोहरा रवैया: मुइज्जू ने ‘इंडिया आउट’ अभियान चलाकर मालदीव से 80 निहत्थे भारतीय सैनिकों को तो बाहर कर दिया, लेकिन अब कह रहे हैं कि अगर चागोस मालदीव को मिला, तो वे वहां विशाल ‘अमेरिकी सैन्य अड्डे’ को चलने देंगे।
2. क्षेत्रीय सुरक्षा: भारत अपने पड़ोस (दक्षिण एशिया) में किसी भी विदेशी सेना का भारी जमावड़ा पसंद नहीं करता।
3. हथियारों की होड़: मालदीव अब तुर्की से हथियार खरीदकर अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। मुइज्जू का झुकाव चीन की तरफ भी है। यह सब हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) की शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है।
निष्कर्ष: चुनाव जीतने के लिए उठाया गया मालदीव का यह कदम पूरे दक्षिण एशिया और हिंद महासागर की भू-राजनीति (Geo-politics) को अस्थिर कर सकता है।
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