
साल 2026 की शुरुआत होते ही एक बात तो साफ हो गई है कि अब ज्यादातर Gen-Z पार्टी और ट्रेंडिंग स्पॉट्स को कम महत्व देते हुए अपनी आस्था और संस्कृति को ज्यादा फॉलो कर रहे हैं. इस बार नए साल पर युवा अपने घर से निकलकर पहाड़ों या क्लब नहीं बल्कि मंदिरों की ओर बढ़ रहे हैं. मथुरा, वाराणसी और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों पर Gen-Z के सैलाब ने साल की पहली सुबह को खास बना दिया.
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में नए साल पर युवाओं का ऐसा आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि दर्शन व्यवस्था को बदलना पड़ा. अब युवा श्रद्धालुओं को पांच द्वारों से प्रवेश दिया जा रहा है, अभी तक चार द्वार से ही भक्तों को प्रवेश दिया जा रहा था. विशेष दर्शन और स्पर्श दर्शन पर प्रतिबंध है. पिछले हफ्ते से भीड़ बढ़ी है और अब तक 20 लाख से ज्यादा लोग दर्शन कर चुके हैं. युवा अपने दोस्तों के साथ भोलेनाथ के गाने गाते हुए नाचते- गाते नजर आए. बैरिकेडिंग और मेडिकल शिविर के इंतजामों के बीच भी Gen-Z का उत्साह कम नहीं हुआ.
मथुरा में दिखी युवाओं की आस्था
कान्हा की नगरी मथुरा में Gen-Z का एक अलग ही सैलाब देखने को मिला. नए साल का स्वागत युवाओं ने राधे-राधे के जयकारों और ढोल-नगाड़ों के साथ किया. बांके बिहारी, राधावल्लभ, बरसाना, नंदगांव और गोकुल में मंदिरों के गलियारों में युवा श्रद्धालु मस्ती और भक्ति दोनों रंग में नजर आ रहे हैं. Gen-Z ने साबित कर दिया कि नए साल का मज़ा जो आस्था और मंदिरों में है वो कही भी नहीं है.
