
1000 साल पहले महमूद गजनी ने जिस सोमनाथ को मिटाने का दुस्साहस किया था, आज उसी पावन धरा पर ‘स्वाभिमान’ का ऐसा शंखनाद हुआ है कि विध्वंसकारियों की रूह कांप जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस शौर्य यात्रा से स्पष्ट संदेश दिया है कि सनातन को मिटाने वाले खुद धूल में मिल गए, लेकिन सोमनाथ आज भी अजेय और अडिग खड़ा है. 108 घोड़ों के साथ जब पीएम मोदी का पुष्प-वर्षा से सजा रथ सोमनाथ की गलियों से निकला, तो आसमान ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा. यह नजारा उस अदम्य साहस की याद दिलाता है जिसने सदियों के संघर्ष को मात दी है. प्रधानमंत्री का माथे पर त्रिपुंड लगाकर शिव भक्ति में लीन होना और हाथ में डमरू व त्रिशूल थामना यह बताता है कि भारत अब अपनी विरासत पर गर्व करना सीख चुका है. यह ‘स्वाभिमान पर्व’ केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि विध्वंस पर विजय की एक अमर गौरवगाथा है.
