
वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर न्यास अध्यादेश 2025 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 15 जनवरी को सुनवाई करेगा. यह याचिका मंदिर के सेवाधिकारियों की तरफ से दाखिल की गई है जो दशकों से मंदिर की देखरेख कर रहे हैं. योगी सरकार द्वारा लाए गए इस अध्यादेश का उद्देश्य 1939 की प्रबंधन योजना को राज्य नियंत्रित ट्रस्ट में बदलना है. पिछली सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि लोग भगवान को भी आराम नहीं करने देते. मामले की सुनवाई के दौरान मैनेजमेंट कमेटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा था कि अदालत को मुख्य तौर पर चार पहलुओं पर गौर करना चाहिए. दिवान ने कहा था कि दर्शन का समय परंपरा से जुड़ा है, पवित्र है, और सुरक्षा व भीड़ नियंत्रण के लिए जरूरी है.
15 दिसंबर 2025 को इस मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी की थी. कोर्ट ने दर्शन के समय में बदलाव और धनी भक्तों को प्राथमिकता देने पर सवाल उठाया था. कोर्ट ने कहा था कि लोग मोटी रकम देकर अनुष्ठान करवाते हैं और भगवान को भी आराम नहीं करने देते. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बांकेबिहारी मंदिर उच्चाधिकार समिति, यूपी सरकार को नोटिस जारी किया था मामले की सुनवाई जनवरी 2026 में सुनवाई के लिए तय कर दी थी.
