
राजस्थान में बजरी खनन का मुद्दा नया नहीं है बल्कि बरसों से ये सूबे की फिजाओं में गूंजता रहा है. अवैध रूप से बजरी खनन का यह मामला सड़कों से लेकर राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रहा है. अवैध बजरी खनन और खनन माफिया हर चुनाव में अक्सर मुद्दा बनते हैं. सड़कों पर इसको लेकर घमासान होता रहा है. अवैध बजरी खनन के कारण बिगड़ती कानून व्यवस्था भी किसी से छिपी नहीं है. इसमें बजरी माफिया और पुलिस की मिलीभगत के कई बार सबूत आमजन दे चुकी है लेकिन कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. पहली बार पुलिस मुख्यालय ने पहल करते हुए ‘डिकॉय ऑपरेशन’ कर पुलिस की पोल खुद ही खोली है. इसका परिणाम सबके सामने है. सीधे तौर पर 11 थानाप्रभारियों और अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका में इसमें सामने आई. इस पर डीजीपी के निर्देश पर पांच एसएचओ को सस्पेंड और 6 को लाइन हाजिर कर दिया गया. पीएचक्यू की यह कार्रवाई आमजन को सुकून पहुंचाने वाली है.
राजस्थान में बजरी खनन माफियाओं के सड़कों पर तेज स्पीड में दौड़ते ओवरलोड डंपर न जानें कितने ही लोगों की जिंदगी को अपने चक्कों के नीचे चकनाचूर कर चुके हैं. कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर कई बार बड़ा संकट खड़ा कर चुके हैं. राजस्थान और अवैध बजरी खनन दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. राजस्थान में बजरी माफिया ने अवैध बजरी खनन कर मरुधरा की कई नदियों के पेटे खाली कर दिए. बजरी के लिए कई पहाड़ी इलाकों को खोखला कर डाला. बजरी के लिए वहां से सॉफ्ट पत्थरों खनन कर धरती की सूरत ही बिगाड़ डाली. राजस्थान की सरजमीं में इतने बड़े-बड़े गड्डे कर दिए कि उनको बरसों तक नहीं भरा जा सकता है. मोटी कमाई के लिए राजस्थान की धरती को जगह-जगह से छलनी कर डाला
