
दुनिया में अमेरिकी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट एफ-35 की तूती बोलती है. इस फाइटर जेट की क्षमता को आज की तारीख में कोई भी देश चुनौती नहीं दे सकता है. इसके बाद राफेल, सुखोई-57, चीनी जे-35, यूरो फाइटर जैसे फाइटर जेट्स आते हैं. ये सभी ए+ या ए श्रेणी के जेट्स हैं. लेकिन, इन फाइटर जेट्स को खरीदने से ज्यादा बड़ी टेंशन इनको उड़ाने में होती है. इन विमानों को उड़ाना हर किसी के बस की बात नहीं हैं. यानी ये सफेद हाथी हैं जिनको खरीदने से ज्यादा टेंशन पालने की होती है.
आज दुनिया बदल रही है. युद्ध के तरीके बदल रहे हैं. जमीनी की जगह हवाई जंग का महत्व बढ़ गया है. हर देश अब अपनी एयरफोर्स को मजबूत करने में जुटी है. ऐसे में भारत भी पूरी शिद्दत से अपनी एयरफोर्स को मजबूत करने में जुटा है. इस वक्त भारतीय एयरफोर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती फाइटर जेट्स की कमी को पूरा करना है. एयरफोर्स को फाइटर जेट्स के 42 स्क्वड्रन की जरूरत है, लेकिन उसके पास ऑपरेशनल केवल 30 स्क्वाड्रन हैं. एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं. इसके अलावा आने वाले समय में कई स्क्वाड्रन रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में यह अंतर और बढ़ने वाला है.
