
जिले में फर्जी फाइनेंसिंग गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. सिंहपुर थाना क्षेत्र में सक्रिय यह गिरोह गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासियों को आसान वाहन दिलाने का लालच देकर उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल करता था. इन दस्तावेजों के आधार पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों का फाइनेंस कराया जाता और फिर वाहन बाजार में बेच दिए जाते थे. जब किस्त चुकाने की जिम्मेदारी आई, तो असली नाम वाले आदिवासी कर्जदार बन गए. पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क ने सुनियोजित तरीके से करीब 18 लाख रुपए की ठगी को अंजाम दिया. यही वजह है कि पुलिस इस मामले को संगठित आर्थिक अपराध मान रही है.
इस फर्जीवाड़े की परतें खुलनी तब शुरू हुईं, जब सिंहपुर निवासी अनवर अली ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के बाद पुलिस ने जब दस्तावेज, फाइनेंस रिकॉर्ड और वाहन बिक्री के डेटा की जांच की, तो पूरा सिस्टम सामने आने लगा. यह कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि एक ऐसा गिरोह था, जिसने एजेंटों, फाइनेंस कंपनियों और वाहन खरीदारों की कड़ी बनाकर आदिवासियों को निशाना बनाया. शुरुआती जांच में ही पुलिस ने 14 वाहन जब्त किए, जिनकी कुल कीमत करीब 18 लाख रुपए आंकी गई है. चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह के तार जिले के बाहर या अन्य राज्यों से तो नहीं जुड़े हैं.
