क्या आप जानते हैं? भारत और बांग्लादेश दोनों के पास ‘Chicken’s Neck’ है! 🐔🗺️
अक्सर हम भारत के ‘सिलिगुड़ी कॉरिडोर’ के बारे में सुनते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि उसके पास भी ऐसे ही सामरिक (strategic) रूप से नाजुक गलियारे हैं?
ये वो संकरे रास्ते हैं जो अगर बंद हो जाएं, तो देश का एक बड़ा हिस्सा बाकी हिस्से से कट सकता है। आइए नक्शे और आंकड़ों से समझते हैं! 👇
1️⃣ भारत का ‘चिकन नेक’ (Siliguri Corridor):
📍 स्थान: पश्चिम बंगाल। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के बीच फंसा हुआ।
📏 चौड़ाई (Width): यह गलियारा सबसे संकरी जगह पर केवल 20-22 किमी चौड़ा है।
🤔 महत्व: यह मुख्य भारत को उत्तर-पूर्व के 7 राज्यों (Seven Sisters) से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी रास्ता है। सामरिक दृष्टि से यह भारत के लिए अत्यंत संवेदनशील है।
2️⃣ बांग्लादेश के ‘चिकन नेक्स’ (Bangladesh’s Necks):
कम लोग जानते हैं कि बांग्लादेश के भी दो प्रमुख हिस्से ‘गर्दन’ की तरह पतले हैं:
🅰️ रंगपुर कॉरिडोर (Rangpur – उत्तर-पश्चिम):
📍 स्थान: यह भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर के ठीक नीचे स्थित है।
📏 चौड़ाई (Width): इसके कुछ हिस्से बहुत संकरे हैं, रणनीतिक रूप से इसका सबसे पतला हिस्सा लगभग 15-20 किमी माना जाता है।
🤔 महत्व: यदि यह रास्ता बाधित होता है, तो पूरा रंगपुर डिवीजन और उत्तरी बांग्लादेश राजधानी ढाका से कट सकता है।
🅱️ चिटगांव कॉरिडोर (Chittagong – दक्षिण-पूर्व):
📍 स्थान: यह भारत के त्रिपुरा, मिजोरम और बंगाल की खाड़ी के बीच सैंडविच जैसा है।
📏 चौड़ाई (Width): इसकी चौड़ाई अलग-अलग है, लेकिन मुख्य परिवहन मार्ग कुछ स्थानों पर 20-25 किमी तक संकरा हो जाता है (विशेषकर फेनी नदी के पास)।
🤔 महत्व: यह बांग्लादेश की जीवनरेखा है क्योंकि यह देश को उसके सबसे बड़े और महत्वपूर्ण बंदरगाह (Chittagong Port) से जोड़ता है।
🌍 जिओ-पॉलिटिक्स (Geo-politics):
युद्ध या तनाव की स्थिति में ये गलियारे दोनों देशों के लिए ‘Choke Points’ बन सकते हैं। जहां भारत सिलिगुड़ी की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता है, वहीं रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि बांग्लादेश के ये पतले हिस्से किसी संघर्ष की स्थिति में भारतीय सेना के लिए रणनीतिक लाभ (strategic advantage) भी बन सकते हैं।

