
ईरान में विरोध-प्रदर्शन की आग अब पूरे देश में फैल चुकी है. ईरान का कोना-कोना खामेनेई के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है. तेहरान से लेकर गांव-कस्बों तक मौजूदा सरकार के खिलाफ गुस्सा है. ईरान का विरोध प्रदर्शन अब हिंसक हो चुका है. 12 दिनों के विरोध-प्रदर्शन में 45 प्रदर्शनकारी जान गंवा चुके हैं. तेहरान से लेकर इस्फहान, मशहद और छोटे शहरों तक सड़कें प्रदर्शनकारियों से भरी हैं. सरकार ने इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप कर दी हैं, लेकिन इससे आंदोलन रुकने के बजाय और भड़क रहा है. लेकिन बड़ा सवाल है कि आखिर इस बवाल के पीछे कौन है? महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ स्पॉन्टेनियस शुरू हुआ यह आंदोलन कहीं हाईजैक तो नहीं हो गया?
बीते कुछ दिनों से ईरान का प्रदर्शन शांत था, मगर अचानक उग्र कैसे हो गया? ईरान की सड़कें खून से लाल क्यों होने लगीं? आखिर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई का असली दुश्मन कौन? कौन है जो उनकी कुर्सी को हिलाना चाह रहा? सीधे तौर पर देखेंगे तो इसके पीछे आपको अमेरिका ही दिखेगा. ईरान में प्रदर्शन तो महंगाई और खराब अर्थव्यवस्था के चक्कर में शुरू हुआ, मगर अब अमेरिका भी इसमें इंट्रेस्ट ले रहा है. उसे खामेनेई सरकार को उखाड़ फेंकने का एक मौका दिख रहा है. इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को विभीषण मिल चुकी है. जी हां, ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ही इस आंदोनल में आग में घी का काम कर रहे हैं. वह बाहर से ही ईरान में हो रहे इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं.
