
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की बार-बार चेतावनियों के बावजूद चीन में नागरिक समाज के लिए जगह तेजी से सिमटती जा रही है, जबकि विरोध या न्याय की संभावनाएं लगभग खत्म होती दिख रही हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी अधिकारियों की हालिया कार्रवाई यह दर्शाती है कि राज्य किसी भी तरह की स्वायत्तता को लेकर लगातार अधिक असहिष्णु होता जा रहा है, जिससे समाज भय, खामोशी और जबरन अनुरूपता के माहौल में जी रहा है.
म्यांमार के मीडिया आउटलेट ‘मिज़्ज़िमा न्यूज़’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में नए सिरे से शुरू हुए दमन अभियान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, देश के भीतर नागरिक स्वतंत्रताएं कई वर्षों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. श्रमिक कार्यकर्ताओं, छात्र प्रदर्शनकारियों, वकीलों, धार्मिक अनुयायियों और ऑनलाइन टिप्पणीकारों समेत समाज के कई वर्ग बढ़ती निगरानी, मनमानी हिरासत और अपारदर्शी कानूनी सज़ाओं के जाल में फंसते जा रहे हैं.
रिपोर्ट में कहा गया, “यह अलग-थलग घटनाओं की श्रृंखला नहीं, बल्कि दमन का एक व्यवस्थित पैटर्न है, जो धीरे-धीरे सामान्य बना दिया गया है और सार्वजनिक निगाहों से छिपता जा रहा है.” मानवाधिकार समर्थकों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि चीन में मानवाधिकार स्थिति में गंभीर गिरावट आई है, जहां न्यायिक प्रक्रिया से बार-बार इनकार किया जा रहा है और असहमति को दबाने के लिए अस्पष्ट आपराधिक धाराओं का इस्तेमाल किया जा रहा है.
