
मध्य प्रदेश में चल रहे SIR यानी Special Intensive Revision अभियान को लेकर सियासत गरमाई हुई है. विपक्ष सवाल उठा रहा है, तो सरकार सफाई दे रही है. लेकिन इसी विवादित प्रक्रिया के बीच मंदसौर जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने SIR को मानवीय नजरिए से देखने पर मजबूर कर दिया. यह कहानी है एक मां के 22 साल के इंतजार की, एक बेटे के गुम हो जाने के दर्द की और उस चमत्कार की, जो सिर्फ एक औपचारिक दस्तावेजी प्रक्रिया से संभव हुआ. साल 2003 में लव मैरिज के बाद घर छोड़कर गया बेटा विनोद, अब 45 साल की उम्र में अपनी मां रामकन्या बाई से फिर मिला.
मंदसौर में ग्रामीण बताते हैं कि SIR की जिस प्रक्रिया को राजनीतिक नजर से देखा जा रहा था, उसी ने एक बिखरे परिवार को फिर से जोड़ दिया. वोटर लिस्ट अपडेट के दौरान EPIC नंबर की छोटी-सी जरूरत ने एक अधूरी पारिवारिक कहानी को पूरा कर दिया. मंदसौर में अकेली रह रहीं विधवा मां रामकन्या बाई ने बेटे को पाने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी थी. दूसरी ओर, राजस्थान के नागौर जिले में नई जिंदगी बसा चुके विनोद को शायद अंदाजा भी नहीं था कि एक दस्तावेज उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा भावुक मोड़ बन जाएगा.
