
आसमान की 90,000 फीट की ऊचाई पर एक ऐसी गूंज सुनाई दी जिसे न रडार पहचान सके और न ही मिसाइलें रोक सकीं. यह किस्सा है Lockheed Martin D-21 का जिसने 1960 के दशक में ही वो मुकाम हासिल कर लिया था जो आज के आधुनिक ड्रोन के लिए भी एक चुनौती है. जब दुनिया कंप्यूटर के शुरुआती दौर में थी तब अमेरिका ने एक ऐसा सुपरसोनिक जासूस तैयार किया था जो बिना पायलट के आवाज से तीन गुना तेज़ दौड़ सकता था. लेकिन इस कहानी में ट्विस्ट तब आया जब अमेरिका का यह सबसे गुप्त हथियार दुश्मन के आंगन में जा गिरा. इसके बाद शुरू हुआ रूस और चीन का वो रिवर्स इंजीनियरिंग का खेल जिसने शीत युद्ध के समीकरण ही बदल दिए.
D-21 की वो क्षमताएं जिन्होंने दुनिया को चौंकाया
· रफ़्तार का बादशाह: इसकी अधिकतम रफ़्तार 3,200 किमी/घंटा (Mach 3.3) थी.
· अजेय ऊचाई: यह 90,000 फीट की ऊचाई पर उड़ान भर सकता था, जहाँ से यह दुश्मन के परमाणु ठिकानों की तस्वीरें लेता था.
