
विमानन इतिहास में कुछ ऐसी मशीनें बनी हैं जिन्होंने न केवल युद्ध के मैदान को बदला बल्कि फिजिक्स के नियमों को भी चुनौती दी. इसी फेहरिस्त में सबसे ऊपर नाम आता है McDonnell Douglas F-4 Phantom II का. 1950 के दशक के अंतिम सालों में जब यह फाइटर जेट दुनिया के सामने आया तो इसने अपनी रफ्तार और ताकत से सबको दंग कर दिया. 1959 से 1962 के बीच इस ‘किलिंग मशीन’ ने रफ्तार, ऊंचाई और सबसे कम समय में चढ़ाई (Time-to-climb) के 20 से ज्यादा वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए.
यह विमान इतना शक्तिशाली था कि इसे ब्रूट फोर्स इंजीनियरिंग का चमत्कार कहा जाता है. जहां उस दौर के अन्य फाइटर जेट हल्के और छोटे होने की कोशिश कर रहे थे, वहीं F-4 फैंटम एक भारी-भरकम राइनो की तरह था. इसका वजन 60,000 पाउंड था फिर भी यह Mach 2.23 की अविश्वसनीय गति से उड़ सकता था. अमेरिकी नौसेना के टेस्ट पायलटों ने इस जेट के जरिए सोवियत संघ के रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि हवा में इससे तेज और घातक फिलहाल कोई दूसरा नहीं है.
