
काफी लंबे इंतज़ार और बड़े दावों के बाद शुरू हुई भोपाल मेट्रो से शहरवासियों को उम्मीद थी कि अब ट्रैफिक, समय और सफर की परेशानियों से राहत मिलेगी. लेकिन हकीकत जानने के लिए जब हमारी टीम ने एक आम यात्री की तरह एम्स भोपाल से सुभाष नगर तक मेट्रो का सफर किया, तो यह उम्मीदें अधूरी नज़र आईं.
मेट्रो का यह सफर यात्रियों के लिए सुविधा से ज्यादा धैर्य की परीक्षा बनता दिखा. शहर की रफ्तार बढ़ाने के लिए शुरू की गई मेट्रो फिलहाल खुद अपनी रफ्तार तलाशती नजर आ रही है.
एक से डेढ घंटे का इंतजार
एम्स से सुभाष नगर के बीच फिलहाल केवल एक ही ट्रेन चलाई जा रही है. इसका सीधा असर यह है कि यात्रियों को 1 से डेढ़ घंटे तक प्लेटफॉर्म पर इंतज़ार करना पड़ रहा है. सुभाष नगर स्टेशन पर हमारी मुलाकात एक बुज़ुर्ग यात्री से हुई, जो इलाज के लिए एम्स जा रहे थे. उन्होंने बताया कि वे हार्ट और शुगर के मरीज हैं और उन्हें जल्दी अस्पताल पहुंचना था, लेकिन मेट्रो के इंतज़ार में 40 मिनट स्टेशन पर ही खड़े रहना पड़ा. न बैठने की जगह थी, न पीने के पानी की व्यवस्था.
