
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिख धर्म के गुरुओं और विशेष रूप से गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों के बलिदान की गाथाओं को राज्य के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा. साहिबजादा फतेह सिंह और साहिबजादा जोरावर सिंह का बलिदान भारतीय इतिहास के उन अध्यायों में शामिल है, जो कम उम्र में भी अन्याय के सामने झुकने से इनकार करने की मिसाल पेश करते हैं. वीर बाल दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही सच्चाई, धर्म और आत्मसम्मान जैसे मूल्यों को समाज में स्थायी रूप से स्थापित किया जा सकता है.
डॉ. मोहन यादव ने यह बात वीर बाल दिवस पर भोपाल के गुरुद्वारा हमीदिया रोड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही. उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं और वीरों का जीवन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र रक्षा, सामाजिक समानता और मानवता की मिसाल भी है. मुख्यमंत्री ने माना कि आज की युवा पीढ़ी तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में अपने ऐतिहासिक मूल्यों से दूर हो रही है. ऐसे में शैक्षणिक पाठ्यक्रम में सिख वीरों की गाथाओं को शामिल करना समय की आवश्यकता है. इससे बच्चों और युवाओं को यह समझने का अवसर मिलेगा कि धर्म और सच्चाई की रक्षा के लिए किस तरह असाधारण साहस और त्याग की जरूरत होती है. यह पहल शिक्षा को केवल डिग्री नहीं, बल्कि संस्कारों का माध्यम बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
