
उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच तेज हो गई है. इस बड़े सिंडिकेट की जांच के दौरान जौनपुर के एक पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक का नाम सामने आया है, जिसके फर्जी दस्तावेजों पर आधारित दवा फर्मों के खातों से वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिली है.
जांच एजेंसियों के अनुसार, सिंडिकेट के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के साथ जुड़े बर्खास्त पुलिसकर्मी आलोक सिंह और अमित सिंह उर्फ अमित टाटा से पूछताछ के दौरान यह कनेक्शन उजागर हुआ. इन फर्मों के माध्यम से फर्जी बिलिंग और जाली लाइसेंस के जरिए लाखों बोतलों की कोडीन-युक्त कफ सिरप की आपूर्ति की गई, जिसका इस्तेमाल नशीले पदार्थ के रूप में होता था. यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लेकर पड़ोसी राज्यों और बांग्लादेश तक फैला हुआ था.
जल्द जारी हो सकता है नोटिस
ईडी सूत्रों के मुताबिक, पूर्व विधायक के नाम से जुड़े कुछ लेन-देन की जांच चल रही है. आशंका जताई जा रही है कि सिंडिकेट को फंडिंग या सप्लाई चेन में सहयोग के बदले रकम का लेन-देन हुआ हो सकता है. हालांकि, अभी तक पूर्व विधायक के खिलाफ कोई औपचारिक आरोप नहीं लगा है, लेकिन जांच को और मजबूत करने के बाद ईडी जल्द ही उन्हें नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है.
