
खाड़ी यानी गल्फ रीजन में दो देशों का दबदबा रहा है. सऊदी अरब और यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात. दोनों सुन्नी मुस्लिम वाले देश हैं. मीडिल ईस्ट में इन दोनों का कद काफी बड़ा है. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को लंबे समय तक एक-दूसरे का सबसे भरोसेमंद साझेदार माना जाता रहा है. यूं कहें कि खाड़ी क्षेत्र के ये दोनों दिग्गज सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात कभी एक-दूसरे पर जान छिड़कते थे. जब खाड़ी में मुसीबत आई तो दोनों एक-दूसरे की ढाल बनकर खड़े रहे. मगर आज दोनों के बीच दुश्मनी हो गई है. ये दोनों देश एक-दूसरे के खून के प्यासे हो चुके हैं. एक-दूसरे को फूटी आंखों से भी नहीं सुहाते हैं. कारण गल्फ रीजन में कॉम्पिटिशन और मुस्लिम देशों का खलीफा बनने की होड़. सुरक्षा हो या तेल और कूटनीति हो या क्षेत्रीय राजनीति, हर मोर्चे पर दोनों कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे मगर बीते कुछ सालों में हालात बदल गए. दोनों के बीच अविश्वास की खाई इस कदर बढ़ गई कि आज यह दोस्ती दुश्मनी में बदल चुकी है. अब यमन मसले पर सऊदी अरब और यूएई में तन चुकी है.
दरअसल, सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव अब चरम पर है. यमन की धरती पर सऊदी और यूएई आपस में लड़ बैठे हैं. सऊदी अरब ने मंगलवार को यमन में यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े हथियारों की खेप पर हवाई हमला किया. इससे सऊदी अरब और यूएई के बीच रिश्ते तल्ख हो गए. यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर सऊदी की आर्मी ने दनादन बम बरसाए. इससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया. हालात इतने बिगड़ गए कि यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने यूएई की सेना को देश छोड़ने के लिए महज 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया. इसके बाद आनन-फानन में यूएई ने भी अपनी बची हुई सेना को वापस बुला लिया. यूएई के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि वह यमन से अपनी बची सैन्य मौजूदगी भी ख़त्म कर देगा. अगर इतिहास के पन्ने पलटेंगे तो पाएंगे कि दोनों देशों के बीच दुश्मनी पुरानी नहीं है. ये दोनों दोस्त अच्छे दोस्त रहे हैं. या यूं कहें कि गल्फ कंट्रीज में इन दोनों देशों की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी मगर अपने-अपने हितों की वजह से ये दोस्ती अब दुश्मनी में बदल चुकी है. चलिए जानते हैं दोस्ती से दुश्मनी की पूरी कहानी.
