
मध्य प्रदेश का इंदौर शहर देशभर में स्वच्छता और बेहतर शहरी व्यवस्था की मिसाल माना जाता रहा है. वही शहर इन दिनों एक ऐसी त्रासदी से जूझ रहा है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया. भगीरथपुरा इलाके में पीने के पानी में सीवर का गंदा पानी मिल गया और यह जहर धीरे-धीरे घर-घर पहुंचता चला गया. लोग पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी शिकायतें लेकर अस्पताल पहुंचने लगे. शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि यह कोई मामूली मामला नहीं, बल्कि एक भयावह स्वास्थ्य संकट बनने जा रहा है. इस गंदे जहरीले पानी से मासूम बच्चों सहित कम से कम 15 लोगों की जान चली गई, जबकि 200 के करीब लोग अस्पताल में भर्ती हैं और उनमें से 32 का इलाज आईसीयू में चल रहा है.
यहां पूरा संकट 25 दिसंबर को सामने आना शुरू हुआ, जब पेट से जुड़ी समस्याओं के चलते करीब 70 मरीज अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे थे. डॉक्टरों को लगा, यह मौसम से जुड़ी सामान्य बीमारी होगी. लेकिन चार दिन बाद तस्वीर बदल चुकी थी. 29 दिसंबर को मरीजों की संख्या 129 हो गई, 30 दिसंबर को 240 और 31 दिसंबर तक यह आंकड़ा 310 तक पहुंच गया. हर दिन बढ़ते ये नंबर सिर्फ आंकड़े नहीं थे, बल्कि उन घरों की कहानी थे, जहां अचानक बीमारी ने दस्तक दी थी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी इंदौर जोन की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉक्टर नितिन ओझा बताते हैं कि सबसे दर्दनाक पल वह था, जब उन्हें समझ आया कि संक्रमण कई दिनों से फैल रहा था. गंदा पानी चुपचाप पाइपलाइनों से बहता रहा और लोग उसे पीते रहे. जब तक पहली मौत सामने आई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डर और अफरातफरी का माहौल बन गया. लोग उबला पानी पीने लगे, लेकिन कई घरों तक वह सलाह समय पर नहीं पहुंच पाई.
