
इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर कहकर तमगे चिपकाए जाते हैं, लेकिन यह चमकदार टैग अब सिस्टम की जानलेवा लापरवाही का सबूत बन चुका है. इंदौर शहर की हर साल स्वच्छता रैंकिंग आती है, अफसर फोटो खिंचवाते हैं, मेयर विदेशों में जाकर अपने मॉडल की शेखी बघारते हैं, और यही शहर आज बेकसूर आम लोगों की अकाल मौतों पर आंसू बहा रहा है. इसी शहर में पीने का पानी लोगों की जान ले रहा है, सबसे बड़े अस्पताल के आईसीयू में नवजातों को चूहे कुतर रहे हैं, नो एंट्री में ट्रक घुसकर कुचल देते हैं, और तेज रफ्तार बसें मौत बांटती घूम रही हैं, विदेशी महिला क्रिकेट खिलाड़ियों की सुरक्षा में चूक हो जाती है. सवाल है कि इन सब के पीछे कौन जिम्मेदार है; सिस्टम की इस घिनौनी गंदगी पर कौन सवाल पूछेगा और कौन साफ करेगा यह सड़ांध?
स्वच्छता की झूठी चमक के पीछे छिपी यह जानलेवा लापरवाही इंदौर को नरक बना रही है. सबसे स्वच्छ शहर में सबसे बड़ी गंदगी कौन है? क्या वे अफसर, नेता और मेयर जो वाहवाही लूटने में तो मौका नहीं छोड़ते हैं, लेकिन जवाबदेही से मुंह फेरते हैं! क्या लापरवाही का जिम्मेदार प्रशासन को ही माना जाएगा. क्या जनता को और मुखर होकर अपने सिस्टम को सुधारना होगा. यहां जमे रहे अफसरों को अपने करियर चमकाने और सिस्टम को जम्पिंग पैड बनाने का दोषी समझना होगा?
