
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के हाथों में हथकड़ियां डालकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साबित कर दिया कि वे अपनी जिद पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. वेनेजुएला पर अटैक के बाद लगा कि शायद वहां विपक्ष को सत्ता सौंप दी जाएगी. लेकिन मादुरो का अपहरण होते ही ट्रंप ने अपने पत्ते खोल दिए हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो कुछ कहा, उसने साबित कर दिया कि यह पूरी कवायद वेनेजुएला की आजादी के लिए नहीं, बल्कि उसकी धरती में दबे काले सोने की लूट के लिए थी. जिस तरह ट्रंप ने विपक्ष की नेता मारिया कोरीना माचाडो को मक्खी की तरह दूध से निकालकर फेंक दिया और सीधे अमेरिकी तेल कंपनियों की एंट्री का ऐलान किया, उससे एक बात साफ है कि वेनेजुएला अब शांति की ओर नहीं, बल्कि एक भयंकर विद्रोह और गृहयुद्ध की राह पर खड़ा है.
पिछले एक साल से अमेरिका और पश्चिमी मीडिया ने मारिया कोरीना माचाडो को लोकतंत्र की देवी बनाकर पेश किया. उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया, उन्हें मादुरो के खिलाफ क्रांति का चेहरा बनाया गया. माचाडो और उनके समर्थित एडमंडो गोंजालेज को लगा था कि जब मादुरो जाएंगे, तो वेनेजुएला की चाबी उन्हें मिलेगी. लेकिन, जैसे ही काम पूरा हुआ, ट्रंप का असली रंग सामने आ गया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब ट्रंप से माचाडो के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब बेहद अपमानजनक था. उन्होंने साफ कहा, नहीं, मैंने उनसे बात नहीं की… उनके पास देश चलाने के लिए जरूरी सम्मान और समर्थन नहीं है.
