
यह बात आज से ठीक 15 साल पहले 2011 की है. उस दिन भी जनवरी की 9 तारीख ही थी. तेहरान से ईरान एयर की फ्लाइट 277 ने उर्मिया के लिए उड़ान तो भरी थी, लेकिन यह बात का अंदाजा किसी को भी नहीं था कि उनका यह सफर कभी पूरा नहीं होगा. उर्मिया में लैंडिंग से ठीक पहले आसमान में गिरती बर्फ, जमीन पर पसरा सन्नाटा और कॉकपिट में बढ़ते तनाव ने कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी, जिनके चलते यह पैसेंजर फ्लाइट ईरान की एविएशन हिस्ट्री की सबसे भयावह त्रासदी में एक हो गई.
रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दिन तेहरान के मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मौसम पहले से बहुत खराब था, जिसकी वजह से ईरान एयर की यह फ्लाइट अपने शेड्यूल टाइम से करीब दो घंटे की देरी से शाम 6 बजकर 15 मिनट पर टेकऑफ हुई थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि यह देरी पैसेंजर्स को मंजिल तक पहुंचाने के बजाय मौत के बेहद करीब ले जा रही है. इस फ्लाइट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा प्लेन कोई नया एयरक्राफ्ट नहीं, बल्कि तीन इंजन वाला करीब 35 साल पुराना एयरक्राफ्ट था. यह प्लेन 1974 में ईरान एयर के बेड़े में शामिल हुआ था.
कभी बगदाद में जब्त रहा तो कभी कबाड़ की तरह पड़ा रहा प्लेन
आपको बता दें ईरान एयर के इस प्लेन का इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है. 1984 से 1990 तक यह प्लेन इराक के बगदाद में जब्त रहा, फिर 1991 से 2002 बीच स्टोरेज में किसी कबाड़ की तरह पड़ा रहा. कई सालों तक आसमान से दूर रहा यह प्लेन ओवरहॉलिंग के बाद दोबारा सर्विस में लौटा तो, लेकिन 2001 की यह फ्लाइट उसके लिए आखिरी फ्लाइट बन गई. जिस दिन यह प्लेन हादसे का शिकार हुई, उस दिन फ्लाइट के कप्तान 50 साल के फेरेदून दादरस थे, जिसनके पास लगभग 8 हजार घंटे की फ्लाइट का अनुभव था. वहीं, को-पायलट मोहम्मद रजा कारेहतापेह थोड़ा कम अनुभव वाले थे, पर फ्लाइट इंजीनियर मोर्तजा रस्तेगार को भी लंबा अनुभव था.
