
मिडिल ईस्ट और दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में बड़ा बदलाव होता दिख रहा है. सऊदी अरब और परमाणु ताकत वाले एकमात्र मुस्लिम देश पाकिस्तान के बीच बने रक्षा गठबंधन में तुर्की शामिल होने की कोशिश कर रहा है. इस संभावित त्रिपक्षीय सैन्य समझौते को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदलने वाला कदम माना जा रहा है. इजरायल को मिडिल ईस्ट में काउंटर करने के लिए यह जरूरी है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की की इस गठबंधन में एंट्री को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और समझौता होने की पूरी संभावना है. यह रक्षा समझौता सितंबर 2024 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ था, जिसमें कहा गया था कि किसी एक देश पर हमला, सभी पर हमला माना जाएगा. यह प्रावधान नाटो के आर्टिकल-5 से मिलता-जुलता है, जिसमें तुर्की पहले से सदस्य है.
