
सनातन धर्म में माघ मास को बहुत ही पुण्यदायी माना गया है. 75 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जिसकी वजह से इसे साधारण माघ नहीं, बल्कि ‘महामाघ मेला’ कहा जा रहा है, जो इसे ऐतिहासिक बना रहा है. शास्त्रों के अनुसार माघ महीने में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में किया गया स्नान मोक्षदायी फल देता है. माघ मेला 3 जनवरी से शुरू हो चुका है और 15 फरवरी यानी महाशिवरात्रि तक चलेगा.
