
1965 के भारत – पाकिस्तान युद्ध के बाद तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री समझौते के लिए ताशकंद गए. समझौते के तुरंत बाद रात में उनकी तबीयत खराब हुई. इसके बाद वहीं उनका निधन हो गया. ये हतप्रभ कर देने वाली घटना थी. इस पर आज भी सवाल उठते हैं. आखिर एक प्रधानमंत्री की विदेश में कैसे मृत्यु हो गई थी. ये समझौता सोवियत संघ की मध्यस्थता में हो रहा था. अगले दिन उनका पार्थिव शरीर एक विशेष विमान से भारत लाया गया लेकिन इस मृत्यु को लेकर आज भी सवाल उठते हैं. सबसे बड़ा सवाल ये होता है कि उनका पोस्टमार्ट्म क्यों नहीं हुआ. दूसरी अहम बात ये भी कि ताशकंद जाने से पहले उनकी हेल्थ कैसी थी.
11 जनवरी 1966 के दिन ताशकंद में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री शास्त्री का निधन और भारत में पोस्टमार्टम नहीं होना आज भी एक ऐतिहासिक–राजनीतिक बहस और संदेह का विषय है. शास्त्री भारत में बहुत लोकप्रिय प्रधानमंत्री थे. सरकारी तौर पर बताया गया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. यही उनकी मृत्यु की वजह भी बना. ताशकंद में भारतीय दूतावास के डॉक्टर और सोवियत डॉक्टरों ने यही निष्कर्ष दिया.
चूंकि हार्ट अटैक को प्राकृतिक मृत्यु माना जाता है, लिहाजा ऐसी स्थिति में पोस्टमार्ट्म को अनिवार्य नहीं समझा जाता था. सोवियत संघ में ही उनकी शुरुआती मेडिकल जांच हुई. फिर मृत्यु के बाद ताशकंद में ही डॉक्टरों ने उनके शव का परीक्षण किया. भारत सरकार ने सोवियत मेडिकल रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया. तब सोवियत संघ भारत का करीबी रणनीतिक सहयोगी था. इसलिए भारत में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की ज़रूरत महसूस नहीं की गई.
