
पाकिस्तान को इंटरनेशनल मॉनिटरिंग फंड ये सोचकर कर्जा देता है कि वो अपने देश के आर्थिक हालात सुधारेगा और उनके पुराने कर्जे चुकाने की रणनीति बनाएगा. हालांकि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और गंभीर आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां लगातार घाटे में जा रही हैं. एक नई रिपोर्ट के जो बता रही है, उसके मुताबिक इन कंपनियों का शुद्ध घाटा 300 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जबकि करदाताओं के पैसों से दी जाने वाली सरकारी मदद बढ़कर 2.1 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गई है.
