
ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकटों में से एक से गुजर रहा है. 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब सिर्फ महंगाई और बिगड़ती अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि उन्होंने राजनीतिक और मानवाधिकार के मुद्दों को भी अपने केंद्र में ले लिया है. सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है. सड़कों से लेकर अस्पताल तक लाशों से पटे हैं, मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि इन प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल और गिरफ्तार किए गए हैं. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयान और धमकियों ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है.
परमाणु हथियार को लेकर ट्रंप की चेतावनी
मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दी. जब एक पत्रकार ने पूछा कि ईरान कह रहा है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो वह जवाब देगा? इस पर ट्रंप ने मजाक उड़ाने के मूड में कहा – ‘हां, ईरान ने पिछली बार भी यही कहा था. तब मैंने उनके परमाणु ठिकानों को उड़ा दिया था, जो अब उनके पास नहीं हैं. इसलिए उन्हें सही से पेश आना चाहिए.’ इस बयान को सीधे सैन्य धमकी के तौर पर देखा जा रहा है. ट्रंप ने यह भी साफ किया कि वह ईरान में मौजूदा हालात से संतुष्ट नहीं हैं और वहां हो रही हत्याओं को अस्वीकार्य मानते हैं.
