
जिस मुल्क ने वजूद में आने के साथ भारत के खिलाफ जंग का आगाज कर दिया हो, और उसी मुल्क का एक ऐसा शख्स, जिसने एक नहीं दो-दो बार लोकतंत्र की हत्या की हो, उसी शख्स को भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया. जी हां, यह बात सोलह आने पूरी तरह सच है. यह बात आज से 71 साल पहले 1955 के गणतंत्र दिवस समारोह की है. इस गणतंत्र दिवस समारोह के लिए प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार ने पाकिस्तान के तत्कालीन गर्वनर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया था. इस गणतंत्र दिवस पर कुछ और भी ऐसा हुआ था, जब आजाद के भारत के इतिहास में पहली बार हुआ और उसके बाद वह परंपरा बन गई.
पहले बात करते हैं पाकिस्तान के तत्कालीन गर्वनर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद की. अलीगढ़ विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाला मलिक गुलाम मोहम्मद ब्रिटिश सरकार में चार्टर्ड अकाउंटेंट था. भारत-पाकिस्तान के विभाजन से पहले वह भारतीय रेलवे अकाउंट्स सर्विस में भी काम कर चुका था. साथ ही, वह हैदराबाद के निजाम का वित्तीय सलाहकार भी था. 1947 के विभाजन के बाद वह पाकिस्तान का पहला वित्त मंत्री बना. 1951 में लियाकल अली की हत्या के बाद ख्वाजा नजीमुद्दीन ने प्रधानमंत्री बनने के लिए गवर्नर-जनरल का पद छोड़ा और मलिक गुलाम मोहम्मद को इस कुर्सी पर बैठा दिया. ख्वाजा नजीमुद्दीन को क्या पता था कि जिस मलिक गुलाम मोहम्मद को वह गर्वनर जनरल बना रहा है, वहीं एक दिन उसके लिए बर्बादी का सबब बन जाएगा.
