
दिग्विजय सिंह अब राज्यसभा नहीं जाएंगे. मध्य प्रदेश की सियासत के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री ने अचानक यह ऐलान करके सियासी हलकों में हलचल मचा दी है. दिग्विजय सिंह का मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है, लेकिन इससे पहले ही पीछे उनके हटने की घोषणा ने दिल्ली से भोपाल तक कांग्रेस के भीतर चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है. सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि दिग्विजय सिंह का अचानक राज्यसभा से मोहभंग क्यों हुआ? वहीं यह सवाल भी उठने लगा कि दिग्विजय सिंह की जगह अब एमपी से कांग्रेस किसे राज्यसभा भेजेगी. चलिये विस्तार से समझते हैं अंदर खाने चल रही पूरी बात…
दिग्विजय सिंह क्यों नहीं जाएंगे राज्यसभा
दरअसल पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह का यह फैसला कोई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रणनीतिक सोच का हिस्सा है. यह कदम कांग्रेस के उस नए राजनीतिक रोडमैप से जुड़ा माना जा रहा है, जिसे राहुल गांधी पिछले कुछ वर्षों से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. पार्टी नेतृत्व का फोकस अब केवल संसद के भीतर आक्रामक विपक्षी भूमिका निभाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करना प्राथमिकता बन चुका है. इसी सोच के तहत वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों में लगाने और युवा नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम हो रहा है. माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह को भी इसी रणनीति के तहत राज्यसभा की भूमिका से मुक्त कर, दोबारा मैदान में उतारने की तैयारी है.
