देशभर में श्रद्धा और सम्मान की प्रतीक देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को लेकर विवाद अब और गहराता जा रहा है. मामला उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित अहिल्या घाट से जुड़ा है, जहां जिला प्रशासन द्वारा देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा और उससे जुड़े मंदिर को हटाए जाने की कार्रवाई की गई. जैसे ही यह खबर सामने आई, काशी से लेकर मध्य प्रदेश तक विरोध की लहर दौड़ गई.
स्थानीय लोगों और संगठनों का कहना है कि यह प्रतिमा कोई साधारण मूर्ति नहीं, बल्कि अहिल्याबाई होलकर के उस ऐतिहासिक योगदान की प्रतीक है, जिसके तहत उन्होंने काशी के घाटों और मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया था. ऐसे में प्रतिमा हटाना सीधे तौर पर आस्था और इतिहास दोनों पर चोट माना जा रहा है.
काशी से इंदौर तक क्यों भड़का गुस्सा?
प्रतिमा हटाने की घटना सामने आने के बाद मध्य प्रदेश, खासकर इंदौर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई. इंदौर स्थित ऐतिहासिक राजवाड़ा पर इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. लोगों का कहना है कि जिन अहिल्याबाई होलकर ने काशी को संवारा, उन्हीं की प्रतिमा को हटाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
