
16 जनवरी 2026 …ये वो दिन था, जो दुनिया में एक और महायुद्ध की शुरुआत के लिए मुकर्रर हो चुका था. मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा था. अमेरिका में यह चर्चा तेज थी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं. अमेरिकी अखबारों की रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप मन बना चुके थे कि इस बार खामेनेई की सत्ता को उखाड़ फेंकना है. रजा पहलवी के साथ उनकी सीक्रेट मीटिंग हो चुकी थी और ईरान में तख्तापलट का प्लान रेडी था. फिर ऐसा क्या हुआ, जो ट्रंप जैसे शख्स को पीछे हटना पड़ा?
ऐन वक्त पर व्हाइट हाउस का रुख बदला और ईरान पर हमला टाल दिया गया. सवाल यह है कि ट्रंप ने ईरान पर हमला आखिर किसके कहने पर रोका? डोनाल्ड ट्रंप को दुश्मनों का तो दुश्मन मानते ही हैं, दोस्त भी उन पर यकीन करने से पहले सौ बार सोचते हैं. ऐसे में वो कौन था, जिसकी बात ट्रंप टाल नहीं पाए. वैसे तो इसके पीछे अरब देशों की संगठित कूटनीति और क्षेत्रीय डर ने अहम भूमिका निभाई लेकिन प्रेशर दोस्त के कहने से भी पड़ा.
डोनाल्ड ट्रंप को सऊदी के क्राउन प्रिंस ने किया कॉल
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने खुद राष्ट्रपति ट्रंप को फोन कर संयम बरतने की अपील की. सऊदी नेतृत्व को आशंका थी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो तेहरान की जवाबी कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है. सऊदी अधिकारियों का मानना था कि ईरान की प्रतिक्रिया अमेरिका के सैन्य ठिकानों, खाड़ी देशों की सुरक्षा और खासकर एनर्जी मार्केट के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. तेल और गैस आपूर्ति में जरा सी भी रुकावट पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकती है.
