
ग्रीनलैंड को लेकर हाल के दिनों में जो कूटनीतिक हलचल देखने को मिली, उसने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि बदलती वैश्विक राजनीति में यूरोप की सामूहिक आवाज अब अमेरिका को भी सोचने पर मजबूर कर सकती है. जिस मुद्दे पर वॉशिंगटन आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में था, उसी पर यूरोपीय देशों ने एक सुर में विरोध जताया और नतीजा यह हुआ कि अमेरिका को कदम पीछे खींचने पड़े. क्या वाकई डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के सपने को होल्ड कर दिया है या फिर ये उनकी किसी स्टैटजी का हिस्सा है?
ग्रीनलैंड क्यों है रणनीतिक रूप से अहम
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और भले ही वहां आबादी कम हो, लेकिन उसकी जियोपॉलिटिकल महत्ता अहमियत बेहद बड़ी है. आर्कटिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह इलाका सैन्य, ऊर्जा और व्यापारिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है. बर्फ पिघलने के साथ नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं और खनिज संसाधनों तक पहुंच आसान हो रही है. यही वजह है कि अमेरिका लंबे समय से ग्रीनलैंड में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश करता रहा है.
