
बांग्लादेश का रक्तरंचित चैप्टर ऑन है. बांग्लादेश में हिंसा और उथल-पुथल का दौर है. बांग्लादेश अब नोबेल शांति वाले मोहम्मद यूनुस के कंट्रोल से बाहर जा चुका है. कभी हिंदू दीपू की भीड़ हत्या कर देती है तो कभी उस्मान हादी का मर्डर हो जाता है. कभी अखबारों के दफ्तर पर हमला हो जाता है तो कभी भारतीय हाई कमिश्नर के आवास को निशाना बनाया जाता है. कुल मिलाकर बांग्लादेश जल रहा है. कब शांति आएगी, कब बांग्लादेशियों को स्थिर सरकार मिलेगी, इसकी झलक भी नहीं दिख रही. हालांकि, मोहम्मद यूनुस पर अमेरिका का प्रेशर बढ़ता जा रहा है. तभी तो अमेरिका के सामने यूनुस का प्लान फेल हो गया और उन्होंने समय पर ही चुनाव कराने का अश्वासन दे दिया. जी हां, बांग्लादेश में बवाल के बीच मोहम्मद यूनुस अमेरिका की शरण में पहुंचे हैं. सोमवार को मोहम्मद यूनुस ने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से फोन पर बातचीत की और कहा कि बांग्लादेश में समय पर ही चुनाव होंगे. अब सवाल है कि आखिर यूनुस अमेरिका को यह आश्वासन क्यों दे रहे हैं, आखिर अमेरिका क्या कर पाएगा बांग्लादेश में, बांग्लादेश बवाल से अमेरिका टेंशन में क्यों है?
सबसे पहले जानते हैं कि यूनुस ने क्या किया? बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने सर्जियो गोर को फोन मिलाय. इस दौरान उन्होंने साफ किया है कि बांग्लादेश में आम चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे. उन्होंने कहा कि 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे और सरकार इस दिशा में पूरी तरह तैयार है. प्रोफेसर यूनुस ने यह बात सोमवार को अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत सर्जियो गोर से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान कही.उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट के जरिए कहा कि देश की जनता लंबे समय से अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का इंतजार कर रही है, जिसे पहले की तानाशाही सरकार ने उनसे छीन लिया था. अंतरिम सरकार का लक्ष्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता का भरोसा मजबूत हो.
