
मध्यप्रदेश विधानसभा का आगामी बजट सत्र केवल आंकड़ों और योजनाओं का दस्तावेज नहीं रहेगा, बल्कि यह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे राजनीतिक संघर्ष का मंच बनने जा रहा है. डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपने पहले पूर्ण बजट के जरिए ‘विकसित मध्यप्रदेश’ का रोडमैप पेश करने की तैयारी में है. सरकार का फोकस कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढांचे और निवेश पर रहेगा. वहीं विपक्ष इस बजट को बढ़ते कर्ज, महंगाई और बेरोजगारी के चश्मे से देख रहा है. ऐसे में यह सत्र सरकार की नीतियों की परीक्षा भी होगा और विपक्ष की आक्रामकता का इम्तिहान भी.
सूत्रों के मुताबिक इस बार प्रदेश का कुल बजट 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है, जो मध्यप्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट हो सकता है. बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा. सरकार जहां इसे ‘जनता का बजट’ बताकर सामाजिक सुरक्षा और विकास के संतुलन का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे ‘लोक-लुभावन योजनाओं’ और ‘कर्ज के बढ़ते बोझ’ का मिश्रण करार दे रही है. बजट से पहले ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है, जिससे साफ है कि सदन के भीतर और बाहर टकराव तय है.
बजट का आकार और सरकार की रणनीति
इस बजट का सबसे बड़ा आकर्षण इसका संभावित आकार है. 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के अनुमानित बजट के साथ सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने का दावा कर रही है. भाजपा का कहना है कि निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को समान प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार की रणनीति ‘वेलफेयर प्लस ग्रोथ’ मॉडल पर आधारित बताई जा रही है, जिसमें नकद हस्तांतरण योजनाओं के साथ सड़क, बिजली, पानी और औद्योगिक निवेश को आगे बढ़ाया जाएगा.
