
वैश्विक चुनौतियों और संघर्षों के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की पुरानी संरचना पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. भारत ने G4 समूह (भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान) की ओर से सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग को और मजबूती दी है. भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र में अंतर-सरकारी वार्ताओं (IGN) के दौरान G4 की तरफ से 6 बिंदुओं का स्पष्ट खाका पेश किया, जिसमें परिषद की सदस्य संख्या को मौजूदा 15 से बढ़ाकर 25 या 26 करने का प्रस्ताव प्रमुख है.
भारत ने जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र वैश्विक चुनौतियों से अछूता नहीं है. संगठन की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्षों को सार्थक ढंग से संबोधित करने में असमर्थ साबित हो रहा है. इस स्थिति का एक प्रमुख कारण सुरक्षा परिषद की प्रभावशीलता की कमी है, जो व्यापक शक्ति-संतुलन की बदलती गतिशीलता का भी हिस्सा है. पी. हरीश ने G4 के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि सुधार की आवश्यकता अब दिन-प्रतिदिन अधिक स्पष्ट हो रही है.
सुधारों में देरी से मानवीय पीड़ा और दुख में इजाफा होगा. जारी संघर्षों की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, जहां हर दिन असंख्य निर्दोष लोगों की जान जा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि परिणामहीन बैठकों के चक्र में उलझने की गुंजाइश नहीं है. हमें सामूहिक रूप से हर क्षण का सदुपयोग करना होगा. G4 परिणामोन्मुख प्रक्रिया पर लगातार जोर देता आया है. स्पष्ट मील के पत्थरों और समय-सीमाओं वाले टेक्स्ट-आधारित वार्ता को केंद्रीय महत्व दिया जाना चाहिए. G4 एक समेकित मॉडल की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो टेक्स्ट-आधारित वार्ताओं का पूर्ववर्ती चरण हो सकता है. G4 ने सुधारित सुरक्षा परिषद के लिए अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है. परिषद का आकार 15 से बढ़ाकर 25 या 26 सदस्यों का किया जाना चाहिए. यह विस्तार स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में होना चाहिए.
