
लंबे इंतजार और दावों के बाद भोपाल मेट्रो की शुरुआत 21 दिसंबर 2025 को हुई थी। तब शहरवासियों का एक सपना पूरा हुआ था। लेकिन अब भोपाल में मेट्रो अपने ही अस्तित्व के लिए जूझती हुई दिखाई दे रही है। शुरुआती कुछ दिनों के बाद शोर सन्नाटे में बदल गया है। आखिर क्यों थम गई यात्रियों की भीड़? क्या मेट्रो उम्मीदों के पटरी से उतर गई है? आइए जानते हैं, इसके बारे में।
घटते यात्रियों की वजह से मेट्रो के फेरे भी घटे
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो के कॉमर्शियल रन को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन जश्न का माहौल अब चिंता में बदल गया है। सुभाष नगर से एम्स तक, 7 किलोमीटर के इस छोटे से रूट पर मेट्रो अब यात्रियों के लिए तरस रही है। लॉन्च के वक्त जहां रोजाना करीब 7,000 लोग सफर कर रहे थे, वहीं अब यह संख्या सिमटकर सिर्फ 300 से 350 रह गई है। आलम यह है कि लाखों का खर्च हो रहा है और कमाई सिर्फ चंद हजारों में। जानकारी के मुताबिक रोजाना मेट्रो को यात्री टिकिट्स से औसतन 15 हजार की कमाई हो रही है। यात्रियों की इस भारी कमी को देखते हुए प्रबंधन ने मेट्रो के फेरे 17 से घटाकर 13 कर दिए हैं।
