
“मैंने स्पेस स्टेशन की खिड़की से नीचे देखा तो वहां इतिहास खड़ा था.” अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर मौजूद इकलौते अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री क्रिस विलियम्स ने जब अपने कैमरे का लेंस फ्लोरिडा की ओर घुमाया तो उन्हें बादलों के नीचे वह महाबली रॉकेट नजर आया जो इंसान को फिर से चांद की दहलीज तक ले जाने वाला है. शनिवार को आर्टेमिस II रॉकेट को जब लॉन्च पैड 39B पर लाया गया तो क्रिस ने अंतरिक्ष से इसकी एक बेहद खास तस्वीर खींची. हालांकि क्रिस ने सोशल मीडिया पर मजाक में कहा कि उन्हें बेहतर लेंस लेना चाहिए था लेकिन उस फोटो में लॉन्च पैड के दाईं ओर दिख रही रॉकेट की परछाई ने पूरी दुनिया के अंतरिक्ष प्रेमियों का दिल जीत लिया है. यह परछाई गवाह 6 फरवरी 2026 से शुरू होने वाले उस मिशन की जिसके तहत इंसान 50 साल बाद फिर से चांद की ओर कदम बढ़ाएगा.
आर्टेमिस II: क्यों खास है यह मिशन?
आर्टेमिस II अपोलो युग के बाद चांद पर जाने वाला पहला मानवयुक्त (Crewed) मिशन है. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्रीओरियन कैप्सूल में सवार होंगे. रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन चांद की सतह पर महज उतरेंगे नहीं नहीं बल्कि उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग करके स्लिंगशॉट की तरह उसके पीछे से चक्कर लगाकर वापस धरती पर लौटेगा. यह यात्रा किसी भी इंसान द्वारा अब तक तय की गई सबसे लंबी दूरी होगी.
