
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. जिस तरह अमेरिकी जंगी जहाज जुट रहे हैं, उसे देखते हुए मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा गहराता दिख रहा है. अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln तीन वॉरशिप्स के साथ पश्चिम एशिया में पहुंच चुका है और ईरान में हड़कंप मचा हुआ है. पहले ही खबरें आई थीं कि यहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई बंकर में छिप चुके हैं और कमान उनके बेटे ने संभाल ली है.
हालांकि अमेरिका की सेंट्रल कमांड की ओर से कहा गया है कि तीन विनाशक जंगी जहाज और एयरक्राफ्ट कैरियर को इलाके में सुरक्षा कारणों से डिप्लॉय किया गया है लेकिन पश्चिमी मीडिया के सोर्स कह रहे हैं कि अमेरिका ने सटीक हमलों की तैयारी कर रखी है और उनके निशाने पर ईरान के वो सीनियर ऑफिशियल्स हैं, जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान दमनकारी भूमिका निभाई है. हमले इसी हफ्ते हो सकते हैं, हालांकि इनकी आधिकारिक पुष्टि ट्रंप प्रशासन की ओर से नहीं की गई है.
क्यों चुना गया ईरान पर हमले का ये वक्त?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि इस वक्त ईरान की सरकार अपने सबसे कमजोर दौर में है. 1979 में हुए विद्रोह के बाद से अब वो वक्त है, जब ईरान न सिर्फ आर्थिक मोर्चे पर संघर्ष कर रहा है बल्कि सरकार की सत्ता पर पकड़ भी नाजुक हो चुकी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को परिस्थितियां बताई गई हैं और उन्होंने ईरान को ये वॉर्निंग भी दे दी है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. हालांकि देश में विरोध प्रदर्शन ढीले पड़ गए हैं लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि सरकार कमजोर है और हमले का ये सही वक्त है.
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