
अमेरिका की विदेश नीति में अक्सर अजीबोगरीब विरोधाभास देखने को मिलते हैं, और इसका ताजा उदाहरण डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की आहट के साथ देखने को मिल रहा है. एक तरफ अमेरिका को ‘गाजा पीस बोर्ड’ (Gaza Peace Board) जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की भागीदारी से कोई गुरेज नहीं है, लेकिन जब बात पाकिस्तानी नागरिकों को अमेरिका में एंट्री देने की आती है, तो ट्रंप प्रशासन के नियम बेहद सख्त हो जाते हैं. यानी मैसेज साफ है कि ‘हमें अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाकिस्तान की जरूरत तो है, लेकिन हम पाकिस्तानियों को अपने घर (अमेरिका) में आसानी से घुसने नहीं देंगे.’
अमेरिका में लागू सख्त इमीग्रेशन नियमों ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है. इसी समस्या को सुलझाने के लिए इस हफ्ते पाकिस्तान का एक उच्च-स्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका पहुंचा. इस दल ने अमेरिकी सांसदों (Lawmakers) से पुरजोर अपील की है कि उनके देश को उन 75 देशों की ‘ब्लैकलिस्ट’ या ‘सख्त निगरानी वाली सूची’ से बाहर निकाला जाए, जिनके नागरिकों को अमेरिकी वीजा हासिल करने के लिए लोहे के चने चबाने पड़ते हैं.
