
कहानी की शुरुआत करीब 55 साल की एक घटना से करते हैं. यह 1971 की भारत-पाकिस्तान की जंग से जुड़ी है लेकिन इसमें मुख्य किरदार पाकिस्तान नहीं बल्कि अमेरिका है. वर्ष 1947 में देश के बंटवारे के साथ पाकिस्तान का जन्म हुआ. जन्म के कुछ ही समय के भीतर पाकिस्तान अमेरिका की गोद में बैठ गया. उस वक्त अमेरिका को भी पाकिस्तान की जरूरत थी. ऐसे में वह पाकिस्तान प्रेम में कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को नीचा दिखाने से पीछे नहीं हटता था. बावजूद इसके भारत अपनी नीतियों पर अडिग रहा और अमेरिकी को खुश करने की बजाय अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अपने हितों और नैतिकता को महत्व देता रहा.
फिर आया 1971 का वक्त. बांग्लादेश को आजाद कराने के लिए भारत को सीधे तौर पर पाकिस्तान से जंग लड़नी पड़ी. इस जंग में अमेरिका पाकिस्तान के साथ था. उसने कई मौकों पर भारत को धमकाने की कोशिश की. इतना ही नहीं जंग के वक्त उसने बंगाल की खाड़ी में भारत के खिलाफ सीधे मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली. उसने दिसंबर 1971 में अपना सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी की ओर रवाना कर दिया. ऐसा कर उसने सीधे तौर पर भारत को चुनौती दी. इस बेड़े में 10 नौसैनिक जहाज शामिल थे. खैर, वह तो सोवियत संघ था जिसने भारत की सरहद और अमेरिकी बेड़े के बीच सीना तानकर खड़ा हो गया और इस पूरे खेल को पलट दिया.
