
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार के निधन से राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है. अजित दादा राज्य के छह डिप्टी सीएम रहे. अनुभव के मामले में वह महाराष्ट्र के मौजूदा नेतृत्व यानी सीएम देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे दोनों से सीनियर थे. वह भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना तीनों के नेतृत्व वाली सरकारों में डिप्टी सीएम रहे. लेकिन, कभी सीएम नहीं बन पाए. उन्होंने सीएम बनने की अपनी इच्छा सार्वजनिक तौर पर भी कई बार जाहिर की थी. सीएम बनना उनका सपना था लेकिन अब यह सपना हमेशा-हमेशा के लिए एक अधूरा ख्वाब रह गया है.
दरअसल, ऐसा नहीं है कि अजित पवार के राजनीतिक जीवन में कभी सीएम बनने का मौका नहीं आया. महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार ऐसा संयोग बना था जब अजित पवार राज्य के सीएम बन सकते थे. लेकिन, राजनीति के जानकारों के एक धड़ा यह कहता है कि उनके चाचा और राज्य की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार आगे नहीं आए और दादा सीएम नहीं बन पाए. हालांकि इस दावे को खारिज करने वाले जानकारों का कहना है कि अगर उस वक्त एनसीपी को सीएम की कुर्सी मिलती तो दादा उस कतार में काफी पीछे थे. उनसे कई सीनियर नेता थे और शरद पवार उनको दरकिनार कर अपने भतीजे को सीएम की कुर्सी नहीं दे सकते थे.
