
मिडिल ईस्ट इस समय बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा है. ईरान और अमेरिका के बीच की टेंशन अपने चरम पर पहुंच चुकी है. एक तरफ ईरान ने साफ कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर उसकी पूरी पकड़ है और वह किसी भी खतरे के लिए तैयार है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वह किसी भी ‘असुरक्षित या उकसावे वाली कार्रवाई’ को बर्दाश्त नहीं करेगा. इसी बीच अरब देशों, अरब लीग और कई वैश्विक ताकतों ने चेताया है कि अगर हालात बिगड़े तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया इसकी कीमत चुकाएगी.
ईरान-अमेरिका तनाव की जड़ कहां है?
ईरान और अमेरिका के रिश्ते दशकों से खराब रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक हैं. ईरान में हाल के महीनों में सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए हैं. आर्थिक संकट, मुद्रा के गिरते मूल्य और बेरोजगारी ने आम लोगों को सड़कों पर ला दिया. इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद हजारों लोगों के मारे जाने के आरोप लगे. अमेरिका ने इन घटनाओं को मानवाधिकार उल्लंघन बताया और ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए. इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर फिर से सख्त रुख अपनाया. ट्रंप का कहना है कि ईरान अगर बातचीत नहीं करता तो अमेरिका के पास सैन्य विकल्प खुले हैं.
