
जमीन के सैकड़ों फीट नीचे जहां सूरज की रोशनी भी पहुंचने का रास्ता भूल जाए वहां ईरान अपनी सबसे कीमती और खतरनाक संपत्ति यानी ‘न्यूक्लियर गोल्ड’ को बचाने की आखिरी जंग लड़ रहा है. अमेरिका के 30,000 पाउंड वजनी बंकर-बस्टर बमों के खौफ ने तेहरान को अपनी रणनीतियां बदलने पर मजबूर कर दिया है. सैटेलाइट तस्वीरों में नजर आ रहे मिट्टी के विशाल पहाड़ और दिन-रात दौड़ते डंपर ट्रक गवाही दे रहे हैं कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों के प्रवेश द्वारों को कंक्रीट और मलबे की परतों के नीचे दफन कर रहा है. फोर्डो और नटान्ज पर हुए पिछले हमलों के जख्मों को सहलाते हुए तेहरान अब अपने यूरेनियम भंडार को पहाड़ों के सीने में इतना गहरा छिपा रहा है, जहां वाशिंगटन की सबसे घातक मिसाइलें भी बेअसर साबित हों.
समंदर में आमने-सामने ईरान-यूएस
अमेरिकी नौसेना ईरान के तटों के बेहद करीब पहुंच चुकी है जिसके जवाब में ईरान ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. अरब सागर में अमेरिका का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू समूह USS अब्राहम लिंकन तैनात है जो सीधे ईरान के दिल पर चोट करने की क्षमता रखता है. वहीं, ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास अपने शाहिद बघेरी ड्रोन कैरियर को तैनात कर युद्ध का बिगुल फूंक दिया है. जमीन पर भी स्थिति उतनी ही भयानक है, जहां ईरान अपने परमाणु ठिकानों को बचाने के लिए उन्हें जमीन की गहराइयों में और नीचे धंसा रहा है.
