
ट्रंप के राज में अमेरिका की पॉलिसीज किसी दादागीरी से कम नहीं दिख रही हैं. टैरिफ थोपने से लेकर वीजा तक ट्रंप ने एक के बाद एक कई देशों को नाराज किया है. वहीं, हाल ही में एक बार फिर से कुछ ऐसा ही कारनामा करके उन्होंने अपने सहयोगी देशों की भी नाराजगी मोल लेली है. ट्रंप ने अपने पुराने सहयोगियों यानी यूरोपियन यूनियन से बात मनवाने के लिए तानाशाही का रास्ता चुना है, जिसे इन देशों ने पीठ में छुरे की तरह माना है. मामला यूएस के वीजा बैन को लेकर है, जिसके बाद एक तरह से डिजिटल विश्व युद्ध की शुरुआत हो गई है.
अमेरिका का वो फैसला जिससे नाराज हुआ यूरोप
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पुराने सहयोगियों यानी यूरोपीय देशों की पीठ में छुरा घोंपते हुए 5 दिग्गजों पर ‘वीजा बैन’ लगाने का फैसला सुना दिया. वाशिंगटन ने मंगलवार को फ्रांस के पूर्व ईयू कमिश्नर थिएरी ब्रेटन समेत 5 यूरोपीय नागरिकों को ब्लैकलिस्ट कर दिया. उनका आरोप है कि जिन पर बैन लगाया गया है वो ऑनलाइन नफरत और झूठ बोलने की आजादी का गला घोंट रहे हैं और एलन मस्क के X जैसे अमेरिकी टेक दिग्गजों को टारगेट कर रहे हैं.
ट्रंप इससे पहले भी यूरोपीय देशों को ये बोलकर बेइज्जत कर चुके हैं कि ‘यूरोप अप्रासंगिक होता जा रहा है और वहां की सरकारें सिर्फ लालफीताशाही और सेंसरशिप में बिजी हैं’.
