
भारतीय राजनीति और साहित्य के इतिहास में 25 दिसंबर का दिन विशेष महत्व रखता है. इस दिन एक ऐसे व्यक्तित्व का जन्म हुआ, जिन्होंने शब्दों और अपने विचारों से देश को एक नई दिशा दी. दरअसल, हम बात कर रहे हैं देश के पूर्व प्रधानमंत्री, प्रखर वक्ता, कुशल राजनेता, संवेदनशील कवि और दूरदर्शी राष्ट्रनेता अटल बिहारी वाजपेयी जी की, जिनका जन्म आज ही के दिन 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था. वह केवल सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले नेता नहीं थे, बल्कि वे विचारों के जरिए दिलों पर राज करने वाले व्यक्ति थे. उनकी राजनीति में मर्यादा थी, विरोध में भी सम्मान था और उनकी कविता में राष्ट्र के प्रति गहरी प्रतिबद्धता थी.
अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह और अजातशुत्र कहा गया, क्योंकि वे मतभेदों के बीच भी संवाद और संतुलन का मार्ग चुनते थे. सत्ता में हों या विपक्ष में, उन्होंने हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा. लेकिन राजनीति से इतर, उनकी कविताएं उनके अंतर्मन की आवाज थीं, जो संघर्ष, आत्मविश्वास, आशा और कभी न हार मानने की सीख देती हैं. आज, उनके जन्मदिवस के अवसर पर जब हम उन्हें याद कर रहे हैं, तो उनकी तीन ऐसी कविताओं की ओर नजर डालना जरूरी हो जाता है, जिनमें जीवन में सफल होने का गहरा मंत्र छिपा है. ऐसा मंत्र, जो आज भी हर पीढ़ी को प्रेरित करता है.
