
क्रिसमस और बौद्ध पूर्णिमा की छुट्टियों के कारण में ट्रेन में करीब 1500 लोग सवार थे. कोलंबो फोर्ट स्टेशन से सुबह ट्रेन गाले और मतारा की ओर रवाना हुई. चूंकि इसका रूट समुद्र तटीय इलाके से था, उधर से ट्रेन गुजर रही थी. अचानक सुनामी लहनों ने ट्रेन का का रास्ता रोका, ट्रेन ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोकी, पर अगले ही पहल दूसरी और तीसरी लहरें आयी और ट्रेन लहरों के साथ साथ बह गयी. यह दुनिया का सबसे खरतनाक ट्रेन हादसों में एक था, जिसमें 1500 से अधिक लोगों के मौत की बात कही जा रही है. घटना आज ही के दिन पड़ोसी देश श्रीलंका में हुई थी. पढ़े खौफनाक हादसे की पूरी कहानी-
26 दिसंबर 2004 को श्रीलंका के कोलंबो से सुबह साढ़े छह बजे सी क्वीन एक्सप्रेस गाले और मतारा की ओर रवाना हुई. क्रिसमस और बौद्ध पूर्णिमा की छुट्टियों के कारण ट्रेन 8-10 कोच वाली थी, लेकिन यात्रियों की संख्या 1,500 से ज्यादा थी. बच्चे, पर्यटक और स्थानीय लोग इसमें शामिल थे. समुद्र से महज 200 मीटर दूर होने की वजह से यह पूरा रूट तटीय था, करीब साढ़े 9 बजे ट्रेन पेरालिया के पास पहुंची. जहां पर सुनामी की पहली लहर आई. पानी ट्रैक पर चढ़ गया. ट्रेन रुक गई.
