
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रही. युद्ध ने समुद्र, कूटनीति और वैश्विक राजनीति तक अपना दायरा फैला लिया है. ताजा घटनाक्रम में यूक्रेन ने रूस की शैडो फ्लीट से जुड़े एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमला किया है. यह हमला यूक्रेन की सीमा से करीब 2000 किमी दूर भूमध्य सागर में लीबिया के तट के पास हुआ. यह रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद इस इलाके में पहला ऐसा हमला माना जा रहा है. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी सालाना एंड ऑफ ईयर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे.
पुतिन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर रूस की शैडो फ्लीट को निशाना बनाया गया तो उसका जवाब जरूर दिया जाएगा. बाद में उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों से तेल आपूर्ति नहीं रुकेगी लेकिन इससे नए खतरे जरूर पैदा होंगे. शैडो फ्लीट उन जहाजों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल रूस प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है. इन जहाजों की संख्या एक हजार से ज्यादा बताई जाती है. ये जहाज बार-बार झंडा बदलते हैं और इनके मालिकाना हक को लेकर साफ जानकारी नहीं होती.
जहाज अटैक पर क्या बोला यूक्रेन?
इसी नेटवर्क के जरिए रूस कच्चा तेल बेचकर यूक्रेन युद्ध के लिए पैसा जुटा रहा है. यूक्रेन पहले भी काला सागर में ऐसे जहाजों को निशाना बना चुका है. यूक्रेन की सुरक्षा सेवा SBU के एक सूत्र ने इस हमले को अभूतपूर्व विशेष अभियान बताया. हालांकि ड्रोन कैसे और कहां से लॉन्च हुआ इस पर कोई जानकारी नहीं दी गई. यूक्रेनी पक्ष ने कहा कि जिस जहाज पर हमला हुआ वह खाली था और इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. सूत्र ने साफ कहा कि यूक्रेन अब दुनिया में कहीं भी अपने दुश्मनों को निशाना बना सकता है.
