
पाकिस्तान की वह रणनीति, जिसके तहत वह बड़े-बड़े वादे कर अमेरिका से राजनीतिक और आर्थिक राहत हासिल करता रहा है, अब बदलते अमेरिका में असर खोती दिख रही है. UAE स्थित मीडिया आउटलेट अल अरबिया पोस्ट की एक ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका में नीतियां अब ज्यादा लेन-देन आधारित, सख्त और नेतृत्व-केंद्रित हो चुकी हैं, और ऐसे माहौल में पाकिस्तान का ‘वादे ज्यादा और अमल कम’ वाला मॉडल ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा.
पाकिस्तान के लिए क्या हो सकती है मुश्किल
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा से जुड़ी हाई-रिस्क योजना इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) में सैनिक सहयोग देने के संकेत दिए हैं. बदले में पाकिस्तान अमेरिका से आर्थिक मदद, राजनीतिक संरक्षण और घरेलू राजनीतिक दमन पर चुप्पी चाहता है. लेकिन रिपोर्ट साफ कहती है कि अगर ट्रंप को यह एहसास हुआ कि मुनीर भी अपने पूर्ववर्तियों की तरह सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं और जमीन पर कुछ नहीं बदल रहा, तो यह सौदा बहुत जल्दी टूट सकता है.
रिपोर्ट में इस संभावित समझौते को एक ‘लेन-देन आधारित फॉस्टियन डील’ बताया गया है, जिसमें पाकिस्तान गाजा में भूमिका के बदले अंतरराष्ट्रीय संरक्षण चाहता है. दावा किया गया है कि इस सौदे का एक अहम पहलू अमेरिका की वह चुप्पी है, जो पाकिस्तान में इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाइयों पर देखने को मिल रही है. लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि ISF को लेकर पाकिस्तान कदम पीछे खींच रहा है, जबकि उससे जुड़े भू-राजनीतिक फायदे पूरी तरह वसूलने की कोशिश कर रहा है.
